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mahabharat 1.150.17: ये जलचर पक्षी सारस बड़ी मधुर वाणी में बोल रहे हैं; (अतः) मुझे निश्चय है कि यहाँ (निकट) कोई बड़ा जलाशय अवश्य होगा।॥17॥   |   mahabharat अध्याय 1.150: माता कुन्तीके लिये भीमसेनका जल ले आना, माता और भाइयोंको भूमिपर सोये देखकर भीमका विषाद एवं दुर्योधनके प्रति क्रोध   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 150: माता कुन्तीके लिये भीमसेनका जल ले आना, माता और भाइयोंको भूमिपर सोये देखकर भीमका विषाद एवं दुर्योधनके प्रति क्रोध  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.150.17 
एते रुवन्ति मधुरं सारसा जलचारिण:।
ध्रुवमत्र जलस्थानं महच्चेति मतिर्मम॥ १७॥
 
 
अनुवाद
ये जलचर पक्षी सारस बड़ी मधुर वाणी में बोल रहे हैं; (अतः) मुझे निश्चय है कि यहाँ (निकट) कोई बड़ा जलाशय अवश्य होगा।॥17॥
 
"These aquatic birds, the cranes, are speaking in a very sweet voice; (therefore) I am sure that there must be a large reservoir here (nearby)."॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)