Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.150.13: मैं पाण्डु के पाँचों पुत्रों की माता हूँ और उनके बीच में स्थित हूँ, फिर भी प्यास से व्याकुल हूँ। इस प्रकार कुन्तीदेवी ने अपने पुत्रों से बार-बार यही कहा ॥13॥ | mahabharat अध्याय 1.150: माता कुन्तीके लिये भीमसेनका जल ले आना, माता और भाइयोंको भूमिपर सोये देखकर भीमका विषाद एवं दुर्योधनके प्रति क्रोध । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
माता सती पाण्डवानां पञ्चानां मध्यत: स्थिता।
तृष्णया हि परीतास्मि पुत्रान् भृशमथाब्रवीत्॥ १३॥
अनुवाद
मैं पाण्डु के पाँचों पुत्रों की माता हूँ और उनके बीच में स्थित हूँ, फिर भी प्यास से व्याकुल हूँ। इस प्रकार कुन्तीदेवी ने अपने पुत्रों से बार-बार यही कहा ॥13॥
"I am the mother of the five sons of Pandu and am situated in their midst, yet I am tormented by thirst." Thus Kuntidevi repeated this to her sons again and again. ॥13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥