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mahabharat 1.150.12: तब उन सबने उस निर्जन और विशाल वन में डेरा डाला। तत्पश्चात प्यास से पीड़ित कुन्तीदेवी अपने पुत्रों से बोलीं-॥12॥   |   mahabharat अध्याय 1.150: माता कुन्तीके लिये भीमसेनका जल ले आना, माता और भाइयोंको भूमिपर सोये देखकर भीमका विषाद एवं दुर्योधनके प्रति क्रोध   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 150: माता कुन्तीके लिये भीमसेनका जल ले आना, माता और भाइयोंको भूमिपर सोये देखकर भीमका विषाद एवं दुर्योधनके प्रति क्रोध  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.150.12 
न्यविशन्त हि ते सर्वे निरास्वादे महावने।
ततस्तृषापरिक्लान्ता कुन्ती पुत्रानथाब्रवीत्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
तब उन सबने उस निर्जन और विशाल वन में डेरा डाला। तत्पश्चात प्यास से पीड़ित कुन्तीदेवी अपने पुत्रों से बोलीं-॥12॥
 
Then all of them camped in that desolate and vast forest. Thereafter Kuntidevi, suffering from thirst, spoke to her sons -॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)