Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.150.11: उस समय कुरुवंश के रत्न पाण्डव अत्यधिक परिश्रम और प्यास के कारण अत्यन्त दुःखी हो रहे थे। थकान के कारण उन्हें बहुत नींद भी आ गई थी, जिससे वे आगे बढ़ने में असमर्थ थे॥11॥ | mahabharat अध्याय 1.150: माता कुन्तीके लिये भीमसेनका जल ले आना, माता और भाइयोंको भूमिपर सोये देखकर भीमका विषाद एवं दुर्योधनके प्रति क्रोध । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ते श्रमेण च कौरव्यास्तृष्णया च प्रपीडिता:।
नाशक्नुवंस्तदा गन्तुं निद्रया च प्रवृद्धया॥ ११॥
अनुवाद
उस समय कुरुवंश के रत्न पाण्डव अत्यधिक परिश्रम और प्यास के कारण अत्यन्त दुःखी हो रहे थे। थकान के कारण उन्हें बहुत नींद भी आ गई थी, जिससे वे आगे बढ़ने में असमर्थ थे॥11॥
At that time, the Pandavas, the jewels of the Kuru clan, were suffering a lot due to excessive work and thirst. They had also become very sleepy due to fatigue, due to which they were unable to proceed further.॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥