श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 150: माता कुन्तीके लिये भीमसेनका जल ले आना, माता और भाइयोंको भूमिपर सोये देखकर भीमका विषाद एवं दुर्योधनके प्रति क्रोध  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.150.10 
शीर्णपर्णफलै राजन् बहुगुल्मक्षुपैर्द्रुमै:।
भग्नावभग्नभूयिष्ठैर्नानाद्रुमसमाकुलै:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! (हवा के झोंकों से) वन के बहुत-से छोटे-बड़े वृक्ष और लताएँ झुककर टूट गई थीं। उनके पत्ते और फल इधर-उधर बिखर गए थे और पक्षी उन पर चहचहा रहे थे। इस सब के कारण सब दिशाओं में अन्धकार छा गया था॥10॥
 
O King! (Due to the gusts of wind) many of the big and small trees and creepers in the forest had bent and broken. Their leaves and fruits had scattered here and there and the birds were chirping at them. Due to all this, darkness had spread in all directions.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)