Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.15.5-6: तदनन्तर, बहुत समय बीतने पर, ऐसा सुना जाता है कि पाण्डववंशी राजा जनमेजय ने सर्पसत्र नामक महान यज्ञ का आयोजन किया था। महातपस्वी आस्तिकने सर्पों के नाश के लिए आरम्भ किए गए उस यज्ञ में पधारे और सर्पों को मृत्यु से बचाया। 5-6॥   |   mahabharat अध्याय 1.15: आस्तीकका जन्म तथा मातृशापसे सर्पसत्रमें नष्ट होनेवाले नागवंशकी उनके द्वारा रक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 15: आस्तीकका जन्म तथा मातृशापसे सर्पसत्रमें नष्ट होनेवाले नागवंशकी उनके द्वारा रक्षा  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  1.15.5-6 
अथ दीर्घस्य कालस्य पाण्डवेयो नराधिप:।
आजहार महायज्ञं सर्पसत्रमिति श्रुति:॥ ५॥
तस्मिन् प्रवृत्ते सत्रे तु सर्पाणामन्तकाय वै।
मोचयामास तान् नागानास्तीक: सुमहातपा:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर, बहुत समय बीतने पर, ऐसा सुना जाता है कि पाण्डववंशी राजा जनमेजय ने सर्पसत्र नामक महान यज्ञ का आयोजन किया था। महातपस्वी आस्तिकने सर्पों के नाश के लिए आरम्भ किए गए उस यज्ञ में पधारे और सर्पों को मृत्यु से बचाया। 5-6॥
 
Subsequently, after a long time, it is heard that Pandava dynasty king Janmejaya organized a great yagya called Sarpasatra. The great ascetic Astikane came to the session started for the destruction of snakes and saved the snakes from death. 5-6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)