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mahabharat 1.15.4: आस्तिक वेद-वेदांगों के पारंगत विद्वान, तपस्वी, महात्मा, सब लोगों के प्रति समान भावना रखने वाले तथा पितृ और मातृकुलों के भय को दूर करने वाले थे॥4॥   |   mahabharat अध्याय 1.15: आस्तीकका जन्म तथा मातृशापसे सर्पसत्रमें नष्ट होनेवाले नागवंशकी उनके द्वारा रक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 15: आस्तीकका जन्म तथा मातृशापसे सर्पसत्रमें नष्ट होनेवाले नागवंशकी उनके द्वारा रक्षा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.15.4 
तपस्वी च महात्मा च वेदवेदाङ्गपारग:।
सम: सर्वस्य लोकस्य पितृमातृभयापह:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
आस्तिक वेद-वेदांगों के पारंगत विद्वान, तपस्वी, महात्मा, सब लोगों के प्रति समान भावना रखने वाले तथा पितृ और मातृकुलों के भय को दूर करने वाले थे॥4॥
 
Aastik was an expert scholar of the Vedas and Vedas, an ascetic, a Mahatma, one who had equal feelings towards all people and who removed the fear of the paternal and matrilineal clans. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)