श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 149: धृतराष्ट्र आदिके द्वारा पाण्डवोंके लिये शोकप्रकाश एवं जलांजलिदान तथा पाण्डवोंका वनमें प्रवेश  »  श्लोक d23
 
 
श्लोक  1.149.d23 
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्तस्तु कौरव्य कौरवाणामशृण्वताम्।
आचचक्षे स धर्मात्मा भीष्मायाद्‍भुतकर्मणे॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! इस प्रकार पूछने पर धर्मात्मा विदुर ने कौरवों की बात न सुनकर अद्भुत कर्म करने वाले भीष्म से यह कहा -
 
Vaishmpayana says - Janamejaya! On being asked in this manner, the virtuous Vidur, without listening to the Kauravas, said this to Bhishma, who performed wonderful deeds -
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)