नूनं शांतनवोऽपीह न धर्ममनुवर्तते।
द्रोणश्च विदुरश्चैव कृपश्चान्ये च कौरवा:॥ ५॥
अनुवाद
'निश्चय ही इस विषय में शान्तनु नन्दन भीष्मजी भी धर्म का पालन नहीं कर रहे हैं। द्रोण, विदुर, कृपाचार्य तथा अन्य कौरवों की भी यही स्थिति है॥ 5॥
‘Certainly in this matter even Shantanu Nandan Bhishmaji is not following Dharma. Drona, Vidur, Kripacharya and other Kauravas are also in the same condition.॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥