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mahabharat 1.149.26: धर्मराज की यह बात सुनकर महाबली भीमसेन माता कुन्ती तथा अपने भाइयों को अपने ऊपर उठाकर बड़ी तेजी से चलने लगे।   |   mahabharat अध्याय 1.149: धृतराष्ट्र आदिके द्वारा पाण्डवोंके लिये शोकप्रकाश एवं जलांजलिदान तथा पाण्डवोंका वनमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 149: धृतराष्ट्र आदिके द्वारा पाण्डवोंके लिये शोकप्रकाश एवं जलांजलिदान तथा पाण्डवोंका वनमें प्रवेश  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.149.26 
इत्युक्तो धर्मराजेन भीमसेनो महाबल:।
आदाय कुन्तीं भ्रातृृंश्च जगामाशु महाबल:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
धर्मराज की यह बात सुनकर महाबली भीमसेन माता कुन्ती तथा अपने भाइयों को अपने ऊपर उठाकर बड़ी तेजी से चलने लगे।
 
Upon hearing Dharmaraj say this, the mighty Bhimasena carrying mother Kunti and his brothers on himself began walking very quickly.
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि जतुगृहपर्वणि पाण्डववनप्रवेशे एकोनपञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १४९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत जतुगृहपर्वमें पाण्डवोंका वनमें प्रवेशविषयक एक सौ उनचासवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४९॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २९ श्लोक मिलाकर कुल ५५ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)