धर्मराज की यह बात सुनकर महाबली भीमसेन माता कुन्ती तथा अपने भाइयों को अपने ऊपर उठाकर बड़ी तेजी से चलने लगे।
Upon hearing Dharmaraj say this, the mighty Bhimasena carrying mother Kunti and his brothers on himself began walking very quickly.
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि जतुगृहपर्वणि पाण्डववनप्रवेशे एकोनपञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १४९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत जतुगृहपर्वमें पाण्डवोंका वनमें प्रवेशविषयक एक सौ उनचासवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४९॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २९ श्लोक मिलाकर कुल ५५ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥