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mahabharat 1.149.2: वे (सब) पहुँचते ही आग बुझाने का प्रयत्न करने लगे। उस समय उन्होंने देखा कि सारा घर लाख का बना हुआ था, जो जलकर राख हो गया था। मंत्री पुरोचन भी उसमें जल गया था॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 1.149: धृतराष्ट्र आदिके द्वारा पाण्डवोंके लिये शोकप्रकाश एवं जलांजलिदान तथा पाण्डवोंका वनमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 149: धृतराष्ट्र आदिके द्वारा पाण्डवोंके लिये शोकप्रकाश एवं जलांजलिदान तथा पाण्डवोंका वनमें प्रवेश  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.149.2 
निर्वापयन्तो ज्वलनं ते जना ददृशुस्तत:।
जातुषं तद् गृहं दग्धममात्यं च पुरोचनम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
वे (सब) पहुँचते ही आग बुझाने का प्रयत्न करने लगे। उस समय उन्होंने देखा कि सारा घर लाख का बना हुआ था, जो जलकर राख हो गया था। मंत्री पुरोचन भी उसमें जल गया था॥ 2॥
 
As soon as they arrived, they (all) started trying to extinguish the fire. At that time they saw that the whole house was made of lacquer, which was burnt to ashes. Minister Purochana was also burnt in it.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)