Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.149.14-15: ऐसी स्थिति में पाण्डवों और कुन्ती के हित के लिए मुझे जो कुछ करना चाहिए अथवा जो कुछ मैं कर सकता हूँ, वह सब धन खर्च करके पूरा करना चाहिए। ऐसा कहकर अम्बिकापुत्र धृतराष्ट्र ने अपने भाइयों से घिरे हुए पाण्डवों को जल पिलाने का कार्य सम्पन्न किया॥14-15॥ | mahabharat अध्याय 1.149: धृतराष्ट्र आदिके द्वारा पाण्डवोंके लिये शोकप्रकाश एवं जलांजलिदान तथा पाण्डवोंका वनमें प्रवेश । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं गते मया शक्यं यद् यत् कारयितुं हितम्।
पाण्डवानां च कुन्त्याश्च तत् सर्वं क्रियतां धनै:॥ १४॥
एवमुक्त्वा ततश्चक्रे ज्ञातिभि: परिवारित:।
उदकं पाण्डुपुत्राणां धृतराष्ट्रोऽम्बिकासुत:॥ १५॥
अनुवाद
ऐसी स्थिति में पाण्डवों और कुन्ती के हित के लिए मुझे जो कुछ करना चाहिए अथवा जो कुछ मैं कर सकता हूँ, वह सब धन खर्च करके पूरा करना चाहिए। ऐसा कहकर अम्बिकापुत्र धृतराष्ट्र ने अपने भाइयों से घिरे हुए पाण्डवों को जल पिलाने का कार्य सम्पन्न किया॥14-15॥
"In these circumstances, whatever I must do or whatever I can do for the benefit of the Pandavas and Kunti, should be accomplished by spending all the money." Having said this, Dhritarashtra, son of Ambika, surrounded by his brothers, performed the task of offering water to the Pandavas.॥ 14-15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥