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mahabharat 1.148.8-9: 'इस संकेत से तुम जान लो कि मैं विश्वासपात्र हूँ और विदुरजी ने मुझे भेजा है।' इसके अतिरिक्त, सब प्रकार से अर्थसिद्धि के ज्ञाता विदुरजी ने तुम्हारे लिए पुनः मुझे यह संदेश दिया है कि 'कुन्तीपुत्र! इसमें संदेह नहीं कि तुम अपने भाइयों सहित युद्ध में दुर्योधन, कर्ण और शकुनि को अवश्य परास्त करोगे।'   |   mahabharat अध्याय 1.148: विदुरजीके भेजे हुए नाविकका पाण्डवोंको गंगाजीके पार उतारना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 148: विदुरजीके भेजे हुए नाविकका पाण्डवोंको गंगाजीके पार उतारना  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  1.148.8-9 
तेन मां प्रेषितं विद्धि विश्वस्तं संज्ञयानया।
भूयश्चैवाह मां क्षत्ता विदुर: सर्वतोऽर्थवित्॥ ८॥
कर्णं दुर्योधनं चैव भ्रातृभि: सहितं रणे।
शकुनिं चैव कौन्तेय विजेतासि न संशय:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
'इस संकेत से तुम जान लो कि मैं विश्वासपात्र हूँ और विदुरजी ने मुझे भेजा है।' इसके अतिरिक्त, सब प्रकार से अर्थसिद्धि के ज्ञाता विदुरजी ने तुम्हारे लिए पुनः मुझे यह संदेश दिया है कि 'कुन्तीपुत्र! इसमें संदेह नहीं कि तुम अपने भाइयों सहित युद्ध में दुर्योधन, कर्ण और शकुनि को अवश्य परास्त करोगे।'
 
‘With this sign you should know that I am trustworthy and Vidurji has sent me.’ Besides this, Vidurji, who has the knowledge of Arthasiddhi in all respects, once again gave me this message for you that ‘Son of Kunti! There is no doubt that you, along with your brothers, will certainly defeat Duryodhan, Karna and Shakuni in the war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)