श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 148: विदुरजीके भेजे हुए नाविकका पाण्डवोंको गंगाजीके पार उतारना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.148.7 
कक्षघ्न: शिशिरघ्नश्च महाकक्षे बिलौकस:।
न हन्तीत्येवमात्मानं यो रक्षति स जीवति॥ ७॥
 
 
अनुवाद
(विदुर जी ने आपसे कहा था-) 'जो अग्नि घास और सूखे वृक्षों के वन को जला देती है और शीत को नष्ट कर देती है, वह विशाल वन में फैल जाने पर भी बिलों में रहने वाले चूहे आदि प्राणियों को नहीं जला सकती। जो इस बात को समझकर अपनी रक्षा का उपाय करता है, वह जीवित रहता है।'॥7॥
 
(Vidur ji had told you-) 'The fire which burns the forest of grass and dry trees and destroys the cold cannot burn the animals like rats living in burrows even if it spreads in a huge forest. The one who takes measures to protect himself after understanding this, remains alive.'॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)