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mahabharat 1.148.6: तत्पश्चात् उस पुरुष ने कहा- 'युधिष्ठिर जी! कृपया बुद्धिमान विदुर जी के पूर्व में कहे गए वचनों को पुनः सुनिए, जिनसे मेरी विश्वसनीयता का संकेत मिलता है। मैं आपको स्मरण दिलाने के लिए संकेत स्वरूप यह बात कह रहा हूँ।॥6॥   |   mahabharat अध्याय 1.148: विदुरजीके भेजे हुए नाविकका पाण्डवोंको गंगाजीके पार उतारना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 148: विदुरजीके भेजे हुए नाविकका पाण्डवोंको गंगाजीके पार उतारना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.148.6 
तत: पुनरथोवाच ज्ञापकं पूर्वचोदितम्।
युधिष्ठिर निबोधेदं संज्ञार्थं वचनं कवे:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उस पुरुष ने कहा- 'युधिष्ठिर जी! कृपया बुद्धिमान विदुर जी के पूर्व में कहे गए वचनों को पुनः सुनिए, जिनसे मेरी विश्वसनीयता का संकेत मिलता है। मैं आपको स्मरण दिलाने के लिए संकेत स्वरूप यह बात कह रहा हूँ।॥6॥
 
Thereafter that man said- 'Yudhishthira ji! Please listen again to the words spoken earlier by the wise Vidura ji, which indicates my credibility. I am telling you this as a sign to remind you. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)