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mahabharat 1.148.2: हे कुरुणपुत्र! विदुरजी के बताए अनुसार उचित स्थान पर पहुँचकर उन्होंने वन में पाण्डवों को अपनी माता के साथ देखा, जो नदी में जल की मात्रा का अनुमान लगा रहे थे॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 1.148: विदुरजीके भेजे हुए नाविकका पाण्डवोंको गंगाजीके पार उतारना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 148: विदुरजीके भेजे हुए नाविकका पाण्डवोंको गंगाजीके पार उतारना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.148.2 
स गत्वा तु यथोद्देशं पाण्डवान् ददृशे वने।
जनन्या सह कौरव्य मापयानान् नदीजलम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुणपुत्र! विदुरजी के बताए अनुसार उचित स्थान पर पहुँचकर उन्होंने वन में पाण्डवों को अपनी माता के साथ देखा, जो नदी में जल की मात्रा का अनुमान लगा रहे थे॥ 2॥
 
O son of Kuruṇā! After reaching the right place as told by Viduraji, he saw the Pāṇḍavas along with their mother in the forest, who were estimating the amount of water in the river.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)