श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 148: विदुरजीके भेजे हुए नाविकका पाण्डवोंको गंगाजीके पार उतारना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.148.15 
पाण्डवाश्च महात्मान: प्रतिसंदिश्य वै कवे:।
गङ्गामुत्तीर्य वेगेन जग्मुर्गूढमलक्षिता:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
महात्मा पाण्डव भी विद्वान विदुरजी का सन्देश सुनकर गंगा नदी को पार करके वहाँ से छिपकर शीघ्र ही चले गए। उन्हें न कोई देख सका, न कोई पहचान सका॥15॥
 
Mahatma Pandavas too, after replying to the message of the learned Vidurji, crossed the Ganga and hurried away from there, hiding themselves. No one could see or recognise them.॥ 15॥
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि जतुगृहपर्वणि गङ्गोत्तरणे अष्टचत्वारिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १४८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत जतुगृहपर्वमें पाण्डवोंके गंगापार होनेसे सम्बन्ध रखनेवाला एक सौ अड़तालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)