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mahabharat 1.148.14: नदी पार करके जब वे नदी के दूसरे किनारे पर पहुँचे, तब केवट ने ‘जय हो, जय हो’ कहकर उन सबको आशीर्वाद दिया और जिस मार्ग से आया था, उसी मार्ग से वापस चला गया॥14॥   |   mahabharat अध्याय 1.148: विदुरजीके भेजे हुए नाविकका पाण्डवोंको गंगाजीके पार उतारना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 148: विदुरजीके भेजे हुए नाविकका पाण्डवोंको गंगाजीके पार उतारना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.148.14 
तारयित्वा ततो गङ्गां पारं प्राप्तांश्च सर्वश:।
जयाशिष: प्रयुज्याथ यथागतमगाद्धि स:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
नदी पार करके जब वे नदी के दूसरे किनारे पर पहुँचे, तब केवट ने ‘जय हो, जय हो’ कहकर उन सबको आशीर्वाद दिया और जिस मार्ग से आया था, उसी मार्ग से वापस चला गया॥14॥
 
After crossing the river, when they reached the other bank of the river, the boatman blessed them all saying 'Jai Ho, Jai Ho' and went back the same way he had come.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)