श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 148: विदुरजीके भेजे हुए नाविकका पाण्डवोंको गंगाजीके पार उतारना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.148.10 
इयं वारिपथे युक्ता नौरप्सु सुखगामिनी।
मोचयिष्यति व: सर्वानस्माद् देशान्न संशय:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
यह नाव जलमार्ग के लिए उपयुक्त है। यह जल में बहुत आसानी से चलेगी। इसमें कोई संदेह नहीं कि यह नाव तुम सबको इस देश से बहुत दूर ले जाएगी।॥10॥
 
‘This boat is suitable for waterways. It will move very smoothly in water. There is no doubt that this boat will take you all far away from this country.'॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)