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mahabharat 1.147.3: पापी पुरोचन हमें पूर्णतः विश्वासपात्र समझता है। हमने अब तक इस क्रूर पुरुष को धोखा दिया है। अब मेरी राय में हमारे बच निकलने का उचित समय आ गया है॥3॥   |   mahabharat अध्याय 1.147: लाक्षागृहका दाह और पाण्डवोंका सुरंगके रास्ते निकल जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 147: लाक्षागृहका दाह और पाण्डवोंका सुरंगके रास्ते निकल जाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.147.3 
अस्मानयं सुविश्वस्तान् वेत्ति पाप: पुरोचन:।
वञ्चितोऽयं नृशंसात्मा कालं मन्ये पलायने॥ ३॥
 
 
अनुवाद
पापी पुरोचन हमें पूर्णतः विश्वासपात्र समझता है। हमने अब तक इस क्रूर पुरुष को धोखा दिया है। अब मेरी राय में हमारे बच निकलने का उचित समय आ गया है॥3॥
 
'The sinful Purochana thinks we are completely trustworthy. We have deceived this cruel man till now. Now in my opinion the right time has come for us to escape.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)