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mahabharat 1.147.22: महाबली भीम वायु के समान वेगवान थे। वे बड़ी तेजी से आगे बढ़ रहे थे, अपनी छाती के जोर से वृक्षों को तोड़ रहे थे और पैरों के प्रहार से धरती को चीर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 1.147: लाक्षागृहका दाह और पाण्डवोंका सुरंगके रास्ते निकल जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 147: लाक्षागृहका दाह और पाण्डवोंका सुरंगके रास्ते निकल जाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.147.22 
उरसा पादपान् भञ्जन् महीं पद्‍भ्यां विदारयन्।
स जगामाशु तेजस्वी वातरंहा वृकोदर:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
महाबली भीम वायु के समान वेगवान थे। वे बड़ी तेजी से आगे बढ़ रहे थे, अपनी छाती के जोर से वृक्षों को तोड़ रहे थे और पैरों के प्रहार से धरती को चीर रहे थे।
 
The illustrious Bhima was as fast as the wind. He was moving forward at a great speed, breaking trees with the thrust of his chest and tearing the earth with the kicks of his feet.
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि जतुगृहपर्वणि जतुगृहदाहे सप्तचत्वारिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १४७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत जतुगृहपर्वमें जतुगृहदाहविषयक एक सौ सैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४७॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)