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mahabharat 1.147.16: यह सौभाग्य की बात है कि इस समय यह पापात्मा पुरोचन भी जल गया है, जिसकी बुद्धि अत्यंत दुष्ट थी, जिसने पुरुषों में श्रेष्ठ पाण्डवों को, जो बिना किसी दोष के उस पर पूर्ण विश्वास करते थे, जला डाला था ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 1.147: लाक्षागृहका दाह और पाण्डवोंका सुरंगके रास्ते निकल जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 147: लाक्षागृहका दाह और पाण्डवोंका सुरंगके रास्ते निकल जाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.147.16 
दिष्टॺा त्विदानीं पापात्मा दग्धोऽयमतिदुर्मति:।
अनागस: सुविश्वस्तान् यो ददाह नरोत्तमान्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
यह सौभाग्य की बात है कि इस समय यह पापात्मा पुरोचन भी जल गया है, जिसकी बुद्धि अत्यंत दुष्ट थी, जिसने पुरुषों में श्रेष्ठ पाण्डवों को, जो बिना किसी दोष के उस पर पूर्ण विश्वास करते थे, जला डाला था ॥16॥
 
It is fortunate that this sinful soul Purochana, who had a very evil mind, has also been burnt at this time, who had burnt the best of men, the Pandavas, who had completely trusted him without any fault of theirs. ॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)