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mahabharat 1.146.9: 'जैसे आप विदुरजी के लिए आदरणीय और विश्वसनीय हैं, वैसे ही आप हमारे लिए भी हैं। आपमें और हममें कोई भेद नहीं है। जैसे हम विदुरजी द्वारा रक्षित होने के योग्य हैं, वैसे ही हम आपके द्वारा रक्षित होने के भी योग्य हैं। जैसे वे हमारी रक्षा करते हैं, वैसे ही आप भी हमारी रक्षा करें।॥9॥   |   mahabharat अध्याय 1.146: विदुरके भेजे हुए खनकद्वारा लाक्षागृहमें सुरंगका निर्माण   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 146: विदुरके भेजे हुए खनकद्वारा लाक्षागृहमें सुरंगका निर्माण  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.146.9 
यथा तस्य तथा नस्त्वं निर्विशेषा वयं त्वयि।
भवतश्च यथा तस्य पालयास्मान् यथा कवि:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
'जैसे आप विदुरजी के लिए आदरणीय और विश्वसनीय हैं, वैसे ही आप हमारे लिए भी हैं। आपमें और हममें कोई भेद नहीं है। जैसे हम विदुरजी द्वारा रक्षित होने के योग्य हैं, वैसे ही हम आपके द्वारा रक्षित होने के भी योग्य हैं। जैसे वे हमारी रक्षा करते हैं, वैसे ही आप भी हमारी रक्षा करें।॥9॥
 
‘Just as you are respectable and trustworthy for Vidurji, you are the same for us too. There is no difference between you and us. Just as we are worthy of being protected by Vidurji, we are worthy of being protected by you too. Just as he protects us, you should also protect us in the same way.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)