Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.146.18-19: पुरोचन के भय से सुरंग खोदने वाले ने उसका मुख बंद कर दिया था। दुष्टबुद्धि पुरोचन सदैव घर के द्वार पर ही रहता था और पाण्डव भी रात्रि में शस्त्र लेकर उसी द्वार पर सावधानी से रहते थे। (इसलिए पुरोचन को आग लगाने का अवसर नहीं मिलता था।) दिन में वे वन्य पशुओं को मारने के बहाने एक वन से दूसरे वन में घूमते रहते थे। पाण्डव उस पर विश्वास न करने के कारण भीतर से सदैव सावधान रहते थे, परन्तु बाहर से पुरोचन को धोखा देने के लिए वे विश्वासपात्रों का सा व्यवहार करते थे। हे राजन! यद्यपि वे संतुष्ट न होते थे, फिर भी वे संतुष्ट होकर ऐसे ही रहते थे और बड़े आश्चर्यचकित रहते थे। 18-19। | mahabharat अध्याय 1.146: विदुरके भेजे हुए खनकद्वारा लाक्षागृहमें सुरंगका निर्माण । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पुरोचन के भय से सुरंग खोदने वाले ने उसका मुख बंद कर दिया था। दुष्टबुद्धि पुरोचन सदैव घर के द्वार पर ही रहता था और पाण्डव भी रात्रि में शस्त्र लेकर उसी द्वार पर सावधानी से रहते थे। (इसलिए पुरोचन को आग लगाने का अवसर नहीं मिलता था।) दिन में वे वन्य पशुओं को मारने के बहाने एक वन से दूसरे वन में घूमते रहते थे। पाण्डव उस पर विश्वास न करने के कारण भीतर से सदैव सावधान रहते थे, परन्तु बाहर से पुरोचन को धोखा देने के लिए वे विश्वासपात्रों का सा व्यवहार करते थे। हे राजन! यद्यपि वे संतुष्ट न होते थे, फिर भी वे संतुष्ट होकर ऐसे ही रहते थे और बड़े आश्चर्यचकित रहते थे। 18-19।
Fearing Purochana, the one who dug the tunnel had closed its mouth. The evil-minded Purochana always stayed at the entrance of the house and the Pandavas also used to stay cautiously at that entrance with weapons in their hands at night. (Therefore Purochana did not get a chance to set fire.) During the day they used to roam from one forest to another on the pretext of killing wild animals. The Pandavas were always cautious from within due to not trusting him, but outwardly they behaved like trustworthy people to deceive Purochana. O King! Even though they were not satisfied, they used to stay as if they were satisfied and remained very surprised. 18-19.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥