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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 146: विदुरके भेजे हुए खनकद्वारा लाक्षागृहमें सुरंगका निर्माण  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.146.17 
चक्रे च वेश्मनस्तस्य मध्येनातिमहद् बिलम्।
कपाटयुक्तमज्ञातं समं भूम्याश्च भारत॥ १७॥
 
 
अनुवाद
भरत! उसने उस इमारत के बीचों-बीच एक बड़ी सुरंग खोद दी। उसके प्रवेश द्वार पर दरवाज़े थे। वह ज़मीन के बराबर में बनी थी, इसलिए किसी को पता न चले।
 
Bharat! He dug out a huge tunnel right through the middle of that building. There were doors at its entrance. It was built at the same level as the ground; hence nobody could know about it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)