श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 145: वारणावतमें पाण्डवोंका स्वागत, पुरोचनका सत्कारपूर्वक उन्हें ठहराना, लाक्षागृहमें निवासकी व्यवस्था और युधिष्ठिर एवं भीमसेनकी बातचीत  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.145.8 
अर्चिताश्च नरै: पौरै: पाण्डवा भरतर्षभ।
जग्मुरावसथं पश्चात् पुरोचनपुरस्सरा:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! नगरवासियों द्वारा पूजित और सम्मानित होकर पाण्डव पुरोचन को आगे करके शिविर में चले गए॥8॥
 
Bharatshrestha! Worshiped and respected by the city residents, the Pandavas went to the camp with Purochan in front. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)