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mahabharat 1.145.6: महाराज! नगर में प्रवेश करके वीर पाण्डव सबसे पहले शीघ्रतापूर्वक उन ब्राह्मणों के घर गये जो अपने धर्म परायण थे।   |   mahabharat अध्याय 1.145: वारणावतमें पाण्डवोंका स्वागत, पुरोचनका सत्कारपूर्वक उन्हें ठहराना, लाक्षागृहमें निवासकी व्यवस्था और युधिष्ठिर एवं भीमसेनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 145: वारणावतमें पाण्डवोंका स्वागत, पुरोचनका सत्कारपूर्वक उन्हें ठहराना, लाक्षागृहमें निवासकी व्यवस्था और युधिष्ठिर एवं भीमसेनकी बातचीत  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.145.6 
ते प्रविश्य पुरीं वीरास्तूर्णं जग्मुरथो गृहान्।
ब्राह्मणानां महीपाल रतानां स्वेषु कर्मसु॥ ६॥
 
 
अनुवाद
महाराज! नगर में प्रवेश करके वीर पाण्डव सबसे पहले शीघ्रतापूर्वक उन ब्राह्मणों के घर गये जो अपने धर्म परायण थे।
 
King! After entering the city the valiant Pandavas first of all quickly went to the houses of the Brahmins who were devoted to their religion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)