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mahabharat 1.145.3: कुन्तीपुत्रों के पास पहुँचकर वारणावत के सभी लोगों ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया और उनका अभिवादन और आशीर्वाद देने लगे॥3॥   |   mahabharat अध्याय 1.145: वारणावतमें पाण्डवोंका स्वागत, पुरोचनका सत्कारपूर्वक उन्हें ठहराना, लाक्षागृहमें निवासकी व्यवस्था और युधिष्ठिर एवं भीमसेनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 145: वारणावतमें पाण्डवोंका स्वागत, पुरोचनका सत्कारपूर्वक उन्हें ठहराना, लाक्षागृहमें निवासकी व्यवस्था और युधिष्ठिर एवं भीमसेनकी बातचीत  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.145.3 
ते समासाद्य कौन्तेयान् वारणावतका जना:।
कृत्वा जयाशिष: सर्वे परिवार्यावतस्थिरे॥ ३॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीपुत्रों के पास पहुँचकर वारणावत के सभी लोगों ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया और उनका अभिवादन और आशीर्वाद देने लगे॥3॥
 
Reaching near the sons of Kunti, all the people of Varanavat surrounded them from all sides hailing them and blessing them. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)