श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 145: वारणावतमें पाण्डवोंका स्वागत, पुरोचनका सत्कारपूर्वक उन्हें ठहराना, लाक्षागृहमें निवासकी व्यवस्था और युधिष्ठिर एवं भीमसेनकी बातचीत  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  1.145.29 
ते वयं मृगयाशीलाश्चराम वसुधामिमाम्।
तथा नो विदिता मार्गा भविष्यन्ति पलायताम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
यदि हम सब लोग शिकार करते हुए इस सम्पूर्ण देश में विचरण करें, तो हमें इससे बचने के अनेक मार्ग मिल जाएँगे ॥29॥
 
If we all roam all over this land, engaged in hunting, we will discover many routes to escape from this. ॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)