श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 145: वारणावतमें पाण्डवोंका स्वागत, पुरोचनका सत्कारपूर्वक उन्हें ठहराना, लाक्षागृहमें निवासकी व्यवस्था और युधिष्ठिर एवं भीमसेनकी बातचीत  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  1.145.28 
तदस्माभिरिमं पापं तं च पापं सुयोधनम्।
वञ्चयद्भिर्निवस्तव्यं छन्नावासं क्वचित् क्वचित्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
अतः इस पापी पुरोचन और पापी दुर्योधन को अन्धकार में रखकर हमें यहीं किसी गुप्त स्थान पर निवास करना चाहिए ॥28॥
 
Therefore, keeping this sinful Purochana and the sinful Duryodhana in the dark, we should reside in some secret place here. ॥28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)