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mahabharat 1.145.26: यदि हम लोग जलने के भय से भाग भी जाएँ, तो भी लोभी दुर्योधन अपने गुप्तचरों द्वारा हम सबको मरवा सकता है॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 1.145: वारणावतमें पाण्डवोंका स्वागत, पुरोचनका सत्कारपूर्वक उन्हें ठहराना, लाक्षागृहमें निवासकी व्यवस्था और युधिष्ठिर एवं भीमसेनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 145: वारणावतमें पाण्डवोंका स्वागत, पुरोचनका सत्कारपूर्वक उन्हें ठहराना, लाक्षागृहमें निवासकी व्यवस्था और युधिष्ठिर एवं भीमसेनकी बातचीत  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.145.26 
वयं तु यदि दाहस्य बिभ्यत: प्रद्रवेमहि।
स्पशैर्निर्घातयेत् सर्वान् राज्यलुब्ध: सुयोधन:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
यदि हम लोग जलने के भय से भाग भी जाएँ, तो भी लोभी दुर्योधन अपने गुप्तचरों द्वारा हम सबको मरवा सकता है॥ 26॥
 
Even if we run away in fear of being burnt, the greedy Duryodhan can have us all killed by his spies.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)