अथवापीह दग्धेषु भीष्मोऽस्माकं पितामह:।
धर्म इत्येव कुप्येरन् ये चान्ये कुरुपुङ्गवा:॥ २५॥
अनुवाद
अथवा यह भी सम्भव है कि हमारे यहाँ जला दिए जाने पर हमारे पितामह भीष्म तथा कुरुवंश के अन्य महापुरुष अपना कर्तव्य समझकर उन अत्याचारियों पर क्रोध करें (परन्तु वह क्रोध हमें किस काम का?)॥25॥
Or it is possible that after we are burnt here, our grandfather Bhishma and other great men of the Kuru clan, considering it their duty, may get angry at those tyrants (but of what avail will that anger be to us?)॥ 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥