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mahabharat 1.145.23: यह मूर्ख पुरोहित निन्दा या अधर्म से नहीं डरता तथा दुर्योधन के वश में रहकर भी उसकी आज्ञा के अनुसार आचरण करता है ॥23॥   |   mahabharat अध्याय 1.145: वारणावतमें पाण्डवोंका स्वागत, पुरोचनका सत्कारपूर्वक उन्हें ठहराना, लाक्षागृहमें निवासकी व्यवस्था और युधिष्ठिर एवं भीमसेनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 145: वारणावतमें पाण्डवोंका स्वागत, पुरोचनका सत्कारपूर्वक उन्हें ठहराना, लाक्षागृहमें निवासकी व्यवस्था और युधिष्ठिर एवं भीमसेनकी बातचीत  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.145.23 
नायं बिभेत्युपक्रोशादधर्माद् वा पुरोचन:।
तथा हि वर्तते मन्द: सुयोधनवशे स्थित:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
यह मूर्ख पुरोहित निन्दा या अधर्म से नहीं डरता तथा दुर्योधन के वश में रहकर भी उसकी आज्ञा के अनुसार आचरण करता है ॥23॥
 
This foolish priest is not afraid of criticism or unrighteousness and being under the control of Duryodhana, he behaves as per his orders. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)