श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 145: वारणावतमें पाण्डवोंका स्वागत, पुरोचनका सत्कारपूर्वक उन्हें ठहराना, लाक्षागृहमें निवासकी व्यवस्था और युधिष्ठिर एवं भीमसेनकी बातचीत  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.145.22 
यदि विन्देत चाकारमस्माकं स पुरोचन:।
क्षिप्रकारी ततो भूत्वा प्रदह्यादपि हेतुत:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
यदि पुरोचन हमारे किसी भी प्रयास से हमारे आंतरिक भावों को जान ले, तो वह शीघ्र ही अपना कार्य सिद्ध कर सकता है और हमें किसी न किसी प्रयोजन के लिए जला सकता है ॥22॥
 
If Purochana senses our inner feelings through any of our efforts, he can quickly accomplish his task and burn us for one purpose or another. ॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)