Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.145.21: युधिष्ठिर बोले, "भैया! हमें यहाँ अत्यंत सावधानी से रहना चाहिए, अपने विचारों को अपने बाह्य कर्मों द्वारा प्रकट न करना चाहिए तथा यहाँ से निकल जाने का कोई निश्चित मार्ग ढूँढ़ना चाहिए। मुझे ऐसा करना अच्छा लगता है।" | mahabharat अध्याय 1.145: वारणावतमें पाण्डवोंका स्वागत, पुरोचनका सत्कारपूर्वक उन्हें ठहराना, लाक्षागृहमें निवासकी व्यवस्था और युधिष्ठिर एवं भीमसेनकी बातचीत । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर बोले, "भैया! हमें यहाँ अत्यंत सावधानी से रहना चाहिए, अपने विचारों को अपने बाह्य कर्मों द्वारा प्रकट न करना चाहिए तथा यहाँ से निकल जाने का कोई निश्चित मार्ग ढूँढ़ना चाहिए। मुझे ऐसा करना अच्छा लगता है।"
Yudhishthira said, "Brother! We should stay here with utmost caution, without revealing our thoughts through our outward actions and finding a sure way to escape from here. I like doing this." 21.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥