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mahabharat 1.145.20: भीमसेन बोले, "भैया! यदि आप मानते हैं कि यह घर अग्नि प्रज्वलित करने वाली सामग्री से बना है, तो फिर हम सुरक्षित उसी घर में क्यों नहीं लौट जाते जहाँ हम पहले रहते थे?"   |   mahabharat अध्याय 1.145: वारणावतमें पाण्डवोंका स्वागत, पुरोचनका सत्कारपूर्वक उन्हें ठहराना, लाक्षागृहमें निवासकी व्यवस्था और युधिष्ठिर एवं भीमसेनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 145: वारणावतमें पाण्डवोंका स्वागत, पुरोचनका सत्कारपूर्वक उन्हें ठहराना, लाक्षागृहमें निवासकी व्यवस्था और युधिष्ठिर एवं भीमसेनकी बातचीत  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.145.20 
भीमसेन उवाच
यदीदं गृहमाग्नेयं विहितं मन्यते भवान्।
तथैव साधु गच्छामो यत्र पूर्वोषिता वयम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन बोले, "भैया! यदि आप मानते हैं कि यह घर अग्नि प्रज्वलित करने वाली सामग्री से बना है, तो फिर हम सुरक्षित उसी घर में क्यों नहीं लौट जाते जहाँ हम पहले रहते थे?"
 
Bhimasena said, "Brother! If you believe that this house has been built with materials that ignite fire, then why don't we safely return to the same house where we lived earlier?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)