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mahabharat 1.145.13: घर को ध्यानपूर्वक देखकर पुण्यात्माओं में श्रेष्ठ युधिष्ठिर ने भीमसेन से कहा - 'भैया! यह घर अग्नि उत्पन्न करने वाले पदार्थों से बना हुआ प्रतीत होता है।॥13॥   |   mahabharat अध्याय 1.145: वारणावतमें पाण्डवोंका स्वागत, पुरोचनका सत्कारपूर्वक उन्हें ठहराना, लाक्षागृहमें निवासकी व्यवस्था और युधिष्ठिर एवं भीमसेनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 145: वारणावतमें पाण्डवोंका स्वागत, पुरोचनका सत्कारपूर्वक उन्हें ठहराना, लाक्षागृहमें निवासकी व्यवस्था और युधिष्ठिर एवं भीमसेनकी बातचीत  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.145.13 
तच्चागारमभिप्रेक्ष्य सर्वधर्मभृतां वर:।
उवाचाग्नेयमित्येवं भीमसेनं युधिष्ठिर:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
घर को ध्यानपूर्वक देखकर पुण्यात्माओं में श्रेष्ठ युधिष्ठिर ने भीमसेन से कहा - 'भैया! यह घर अग्नि उत्पन्न करने वाले पदार्थों से बना हुआ प्रतीत होता है।॥13॥
 
After looking at the house carefully, Yudhishthira, the best of all virtuous souls, said to Bhimasena, 'Brother, this house appears to be made of materials that can cause fire.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)