Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.145.10: उस भवन में पुरोचन ने उसका बड़ा ही स्वागत किया। उसने बहुत ही बहुमूल्य सामग्री का उपयोग किया और नगर के बहुत से कुलीन लोग उसकी सेवा में उपस्थित थे। इस प्रकार वह वहाँ (बड़े आनन्द से) रहने लगा॥10॥ | mahabharat अध्याय 1.145: वारणावतमें पाण्डवोंका स्वागत, पुरोचनका सत्कारपूर्वक उन्हें ठहराना, लाक्षागृहमें निवासकी व्यवस्था और युधिष्ठिर एवं भीमसेनकी बातचीत । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्र ते सत्कृतास्तेन सुमहार्हपरिच्छदा:।
उपास्यमाना: पुरुषैरूषु: पुरनिवासिभि:॥ १०॥
अनुवाद
उस भवन में पुरोचन ने उसका बड़ा ही स्वागत किया। उसने बहुत ही बहुमूल्य सामग्री का उपयोग किया और नगर के बहुत से कुलीन लोग उसकी सेवा में उपस्थित थे। इस प्रकार वह वहाँ (बड़े आनन्द से) रहने लगा॥10॥
In that building he was accorded a very warm welcome by Purochana. He used very precious materials and many noble men of the city were present to serve him. Thus he started living there (with great joy).॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥