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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 144: पाण्डवोंकी वारणावत-यात्रा तथा उनको विदुरका गुप्त उपदेश  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.144.25 
अनाप्तैर्दत्तमादत्ते नर: शस्त्रमलोहजम्।
श्वाविच्छरणमासाद्य प्रमुच्येत हुताशनात्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
'जो मनुष्य शत्रुओं द्वारा दिए गए लोहे के अतिरिक्त किसी हथियार को पकड़ लेता है, वह साही के बिल में प्रवेश कर जाता है और अग्नि से बच जाता है।
 
'A man who takes hold of a weapon given by his enemies that is not made of iron, enters a porcupine's hole and is saved from fire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)