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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 144: पाण्डवोंकी वारणावत-यात्रा तथा उनको विदुरका गुप्त उपदेश  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.144.21 
यो जानाति परप्रज्ञां नीतिशास्त्रानुसारिणीम्।
विज्ञायेह तथा कुर्यादापदं निस्तरेद् यथा॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'जो मनुष्य नीति के अनुसार चलने वाले शत्रु की बुद्धि को समझता है, उसे उसे समझकर ऐसे उपाय करने चाहिए, जिससे वह यहाँ शत्रु द्वारा उत्पन्न किये जाने वाले कष्टों से बच सके।
 
'He who understands the wisdom of the enemy which follows the ethics should, after understanding it, adopt such measures that he may escape from the troubles caused by the enemy here.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)