श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 143: दुर्योधनके आदेशसे पुरोचनका वारणावत नगरमें लाक्षागृह बनाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.143.17 
दह्यमाने स्वके गेहे दग्धा इति ततो जना:।
न गर्हयेयुरस्मान् वै पाण्डवार्थाय कर्हिचित्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उस समय लोग यही समझेंगे कि उनके ही घर में आग लग गई और पाण्डव उसमें जल गए। अतः वे पाण्डवों की मृत्यु के लिए हमें कभी दोषी नहीं ठहराएँगे॥17॥
 
‘At that time people will understand that their own house caught fire and the Pandavas were burnt in it. Hence they will never blame us for the death of the Pandavas.'॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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