श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 143: दुर्योधनके आदेशसे पुरोचनका वारणावत नगरमें लाक्षागृह बनाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.143.10 
सर्पिस्तैलवसाभिश्च लाक्षया चाप्यनल्पया।
मृत्तिकां मिश्रयित्वा त्वं लेपं कुडॺेषु दापय॥ १०॥
 
 
अनुवाद
‘घी, तेल, चर्बी और बहुत सा लाख मिट्टी में मिलाकर उससे दीवारों को लीपना।॥10॥
 
‘Mix ghee, oil, fat and lots of lacquer with clay and plaster the walls with it.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)