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mahabharat 1.142.9-10: 'विशेषतः ब्राह्मणों और गायकों को रत्न और धन दो और वहाँ अपनी इच्छानुसार कुछ समय तक विहार करके परम सुख प्राप्त करो, जैसे अत्यंत तेजस्वी देवता करते हैं। तत्पश्चात इस हस्तिनापुर नगर में ही सुखपूर्वक लौट आओ। 9-10॥   |   mahabharat अध्याय 1.142: धृतराष्ट्रके आदेशसे पाण्डवोंकी वारणावत-यात्रा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 142: धृतराष्ट्रके आदेशसे पाण्डवोंकी वारणावत-यात्रा  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  1.142.9-10 
ब्राह्मणेभ्यश्च रत्नानि गायकेभ्यश्च सर्वश:।
प्रयच्छध्वं यथाकामं देवा इव सुवर्चस:॥ ९॥
कंचित् कालं विहृत्यैवमनुभूय परां मुदम्।
इदं वै हास्तिनपुरं सुखिन: पुनरेष्यथ॥ १०॥
 
 
अनुवाद
'विशेषतः ब्राह्मणों और गायकों को रत्न और धन दो और वहाँ अपनी इच्छानुसार कुछ समय तक विहार करके परम सुख प्राप्त करो, जैसे अत्यंत तेजस्वी देवता करते हैं। तत्पश्चात इस हस्तिनापुर नगर में ही सुखपूर्वक लौट आओ। 9-10॥
 
'Give gems and wealth especially to the brahmins and singers and attain supreme happiness by roaming there for some time as per your wish, like very bright gods. After that, come back happily to this city of Hastinapur only. 9-10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)