श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 142: धृतराष्ट्रके आदेशसे पाण्डवोंकी वारणावत-यात्रा  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.142.5 
कथ्यमाने तथा रम्ये नगरे वारणावते।
गमने पाण्डुपुत्राणां जज्ञे तत्र मतिर्नृप॥ ५॥
 
 
अनुवाद
राजा! जब वारणावत नगरी की शोभा का इस प्रकार (यहाँ-वहाँ) वर्णन होने लगा, तब पाण्डवों के मन में वहाँ जाने का विचार उत्पन्न हुआ॥5॥
 
King! When the beauty of the city of Varanavat started being described in this manner (here and there), then the thought of going there arose in the minds of the Pandavas. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)