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mahabharat 1.142.4: वह पवित्र नगरी सब प्रकार के रत्नों से परिपूर्ण है और मनुष्यों के मन को मोह लेने वाली है।’ धृतराष्ट्र के कहने पर वह इस प्रकार कहने लगा॥4॥   |   mahabharat अध्याय 1.142: धृतराष्ट्रके आदेशसे पाण्डवोंकी वारणावत-यात्रा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 142: धृतराष्ट्रके आदेशसे पाण्डवोंकी वारणावत-यात्रा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.142.4 
सर्वरत्नसमाकीर्णे पुंसां देशे मनोरमे।
इत्येवं धृतराष्ट्रस्य वचनाच्चक्रिरे कथा:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
वह पवित्र नगरी सब प्रकार के रत्नों से परिपूर्ण है और मनुष्यों के मन को मोह लेने वाली है।’ धृतराष्ट्र के कहने पर वह इस प्रकार कहने लगा॥4॥
 
'That holy city is filled with all kinds of gems and is a place which captivates the hearts of men.' At the behest of Dhritarashtra he began to speak in this manner. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)