vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 1: आदि पर्व
»
अध्याय 142: धृतराष्ट्रके आदेशसे पाण्डवोंकी वारणावत-यात्रा
»
श्लोक 15
श्लोक
1.142.15
रमणीये जनाकीर्णे नगरे वारणावते।
सगणास्तत्र यास्यामो धृतराष्ट्रस्य शासनात्॥ १५॥
अनुवाद
‘राजा धृतराष्ट्र की आज्ञा से हम लोग अपने परिवार के साथ वारणावत नामक सुन्दर नगरी में जा रहे हैं, जहाँ बहुत बड़ा मेला लगा हुआ है।॥15॥
‘By the order of King Dhritarashtra, we are going with our families to the beautiful city of Varanavat, where a huge fair is being held.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×