श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 142: धृतराष्ट्रके आदेशसे पाण्डवोंकी वारणावत-यात्रा  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.142.15 
रमणीये जनाकीर्णे नगरे वारणावते।
सगणास्तत्र यास्यामो धृतराष्ट्रस्य शासनात्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
‘राजा धृतराष्ट्र की आज्ञा से हम लोग अपने परिवार के साथ वारणावत नामक सुन्दर नगरी में जा रहे हैं, जहाँ बहुत बड़ा मेला लगा हुआ है।॥15॥
 
‘By the order of King Dhritarashtra, we are going with our families to the beautiful city of Varanavat, where a huge fair is being held.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)