Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.142.12-14: तदनन्तर शान्तनुनन्दन भीष्म, परम बुद्धिमान विदुर, द्रोण, बाह्लीक, कुरुवंशी सोमदत्त, कृपाचार्य, अश्वत्थामा, भूरिश्रवा, अन्य माननीय मन्त्रियों, तपस्वी ब्राह्मणों, पुरोहितों, ग्रामवासियों तथा प्रसिद्ध गान्धारी देवी से मिलकर युधिष्ठिर ने धीरे-धीरे विनम्र भाव से कहा- 12-14॥ | mahabharat अध्याय 1.142: धृतराष्ट्रके आदेशसे पाण्डवोंकी वारणावत-यात्रा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततो भीष्मं शांतनवं विदुरं च महामतिम्।
द्रोणं च बाह्लिकं चैव सोमदत्तं च कौरवम्॥ १२॥
कृपमाचार्यपुत्रं च भूरिश्रवसमेव च।
मान्यानन्यानमात्यांश्च ब्राह्मणांश्च तपोधनान्॥ १३॥
पुरोहितांश्च पौरांश्च गान्धारीं च यशस्विनीम्।
युधिष्ठिर: शनैर्दीन उवाचेदं वचस्तदा॥ १४॥
अनुवाद
तदनन्तर शान्तनुनन्दन भीष्म, परम बुद्धिमान विदुर, द्रोण, बाह्लीक, कुरुवंशी सोमदत्त, कृपाचार्य, अश्वत्थामा, भूरिश्रवा, अन्य माननीय मन्त्रियों, तपस्वी ब्राह्मणों, पुरोहितों, ग्रामवासियों तथा प्रसिद्ध गान्धारी देवी से मिलकर युधिष्ठिर ने धीरे-धीरे विनम्र भाव से कहा- 12-14॥
Thereafter, Yudhishthira, meeting Shantanunandan Bhishma, the most intelligent Vidur, Drona, Bahlik, Kuruvanshi Somdutta, Kripacharya, Ashwatthama, Bhurishrava, other honorable ministers, ascetic Brahmins, priests, village residents and the famous Gandhari Devi, slowly said in a humble manner - 12-14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥