Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.142.1-3: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! तत्पश्चात् राजा दुर्योधन और उसके छोटे भाइयों ने धीरे-धीरे समस्त मन्त्रियों तथा अन्य प्रजाजनों को धन देकर तथा सम्मान देकर अपने वश में कर लिया। धृतराष्ट्र की आज्ञा पाकर कुछ चतुर मन्त्रियों ने (चारों ओर) यह चर्चा आरम्भ कर दी कि 'वारणावत नगरी अत्यन्त सुन्दर है। उस नगरी में भगवान शिव की पूजा के लिए जो विशाल मेला लगता है, वह इस पृथ्वी पर सबसे सुन्दर है।'॥1-3॥ | mahabharat अध्याय 1.142: धृतराष्ट्रके आदेशसे पाण्डवोंकी वारणावत-यात्रा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! तत्पश्चात् राजा दुर्योधन और उसके छोटे भाइयों ने धीरे-धीरे समस्त मन्त्रियों तथा अन्य प्रजाजनों को धन देकर तथा सम्मान देकर अपने वश में कर लिया। धृतराष्ट्र की आज्ञा पाकर कुछ चतुर मन्त्रियों ने (चारों ओर) यह चर्चा आरम्भ कर दी कि 'वारणावत नगरी अत्यन्त सुन्दर है। उस नगरी में भगवान शिव की पूजा के लिए जो विशाल मेला लगता है, वह इस पृथ्वी पर सबसे सुन्दर है।'॥1-3॥
Vaishampayana says - Janamejaya! Thereafter, king Duryodhan and his younger brothers gradually brought all the ministers and other natures under their control by giving them money and by honouring them. Some clever ministers, on the orders of Dhritarashtra, started discussing (all around) that 'Varanavat city is very beautiful. The huge fair being organized in that city for the worship of Lord Shiva is the most beautiful on this earth'॥ 1-3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥