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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 141: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे पाण्डवोंको वारणावत भेज देनेका प्रस्ताव  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.141.5 
धृतराष्ट्रस्तु पुत्रेण श्रुत्वा वचनमीरितम्।
मुहूर्तमिव संचिन्त्य दुर्योधनमथाब्रवीत्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
अपने पुत्र की यह बात सुनकर धृतराष्ट्र दो घण्टे तक गहरी चिंता में रहे, फिर उन्होंने दुर्योधन से बात की।
 
On hearing these words of his son, Dhritarashtra remained in deep worry for two hours; then he spoke to Duryodhan.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)