Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.141.22: विदुर भी हमारे धन-बंधन से बंधे हैं, यद्यपि वे गुप्त रूप से हमारे शत्रुओं के स्नेह से बंधे हैं। किन्तु वे अकेले पाण्डवों के हित के लिए हमें कोई हानि नहीं पहुँचा सकेंगे ॥22॥ | mahabharat अध्याय 1.141: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे पाण्डवोंको वारणावत भेज देनेका प्रस्ताव । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्षत्तार्थबद्धस्त्वस्माकं प्रच्छन्नं संयत: परै:।
न चैक: स समर्थोऽस्मान् पाण्डवार्थेऽधिबाधितुम्॥ २२॥
अनुवाद
विदुर भी हमारे धन-बंधन से बंधे हैं, यद्यपि वे गुप्त रूप से हमारे शत्रुओं के स्नेह से बंधे हैं। किन्तु वे अकेले पाण्डवों के हित के लिए हमें कोई हानि नहीं पहुँचा सकेंगे ॥22॥
Vidura is also bound by our financial bondage, although he is secretly bound by the affection of our enemies. But he alone will not be able to cause us any harm for the benefit of the Pandavas. ॥22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥